Significance/ Impact/ Outcome of study/ conference:


Cinema is perhaps the first unique multimedia which synthesized the various aspects of life into one compact experience. As a meeting point of the real and the imaginary, cinema opened up the new avenues of creativity. It merged the arts like literature, music, dance and acting with the sciences of photography, cinematography, sound technology and virtual reality. With its extraordinary visual language it transcended the barriers of spoken language and built the bridges of understanding across the cultures. Though merely 125 years old, cinema has brought about a revolution in human life which has surpassed the evolution of thousands of years. If language was one of the earliest breakthroughs in the progress of human beings with which emerged the concept of culture, cinema may be called one of the latest and ever changing series of advancement which has transformed the human perspective about culture completely. As the architect of mass culture, cinema has played a significant role in the emergence of global literature. Such a powerful tool of firsthand experience must be utilized optimally to teach (and learn) languages, literatures and cultures in the 21st century across the globe.

The present study focusing on SWOT (strengths, weaknesses, opportunities & threats) analysis of the given subject will provide the policy makers with the useful insights in the nature, characteristic features, significance, role & functions of regional Indian cinema. This in turn will equip them with the necessary information & knowledge to formulate both short term & long term policies regarding regional Indian cinema, such as


  • Promoting regional Indian cinema as a mirror of actual life experience of common people.
  • Encouraging new talent in the various fields of arts (like literature, music, dance and acting etc.), commerce (like advertising, PR, business of digital media etc.), science & technology (like photography, cinematography, sound technology and virtual reality etc.) .
  • Generating employment in the field of film making by both diversifying & decentralizing it regionally .
  • Inculcating scientific temper, reason, liberalism & modernity among common people through the mass culture of cinema.
  • Moulding public opinion in desirable way using the popularity of regional cinema .
  • Bringing about social reforms by using cinema as a medium of change .
  • Providing digital space to the subaltern voices such as women & trial’s.
  • Documenting characteristic literary and cultural heritage, social issues and local colours of a particular region & language.
  • Preserving that local literary and cultural heritage.
  • Showcasing ‘real’ India to the world.


परिसंवाद से अपेक्षित परिणाम :


सिनेमा शायद पहला अनूठा मल्टीमीडिया है जिसने जीवन के विभिन्न पहलुओं को एक कॉम्पैक्ट अनुभव में संश्लेषित किया है। वास्तविक और काल्पनिक के मिलन बिंदु के रूप में, सिनेमा ने रचनात्मकता के नए रास्ते खोले। इसमें फोटोग्राफी, छायांकन, ध्वनि प्रौद्योगिकी और आभासी वास्तविकता के विज्ञान के साथ साहित्य, संगीत, नृत्य और अभिनय जैसी कलाओं का विलय/संलयन हुआ। अपनी असाधारण दृश्य भाषा के साथ इसने बोली जाने वाली भाषा की बाधाओं को पार किया और संस्कृतियों के बीच समझ / साझेदारी की नई स्थितियों का निर्माण किया। हालांकि महज 125 साल पुरानी, सिनेमा ने मानव जीवन में एक क्रांति ला दी है जिसने हजारों वर्षों के विकास को पार कर लिया है। यदि भाषा मानव की प्रगति की शुरुआती सफलताओं में से एक थी, जिसके साथ संस्कृति की अवधारणा उभरी, तो सिनेमा को उन्नति की नवीनतम और बदलती श्रृंखला में से एक कहा जा सकता है जिसने संस्कृति के बारे में मानवीय दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया है। जन संस्कृति के वास्तुकार के रूप में, सिनेमा ने वैश्विक साहित्य के उद्भव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 21 वीं सदी में दुनियाभर में भाषाओं, साहित्य और संस्कृतियों को सिखाने (और सीखने) के लिए फर्स्टहैंड अनुभव के इसतरह के एक शक्तिशाली उपकरण का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए।

दिए गए विषय के SWT विश्लेषण पर केंद्रित वर्तमान अध्ययन, नीति निर्माताओं को क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा की प्रकृति, विशेषताओं, महत्व, भूमिका और कार्यों में उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा। यह उन्हें क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा के बारे में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों नीतियों को बनाने के लिए आवश्यक जानकारी और ज्ञान से संपन्न करेगा,जैसे कि


  • क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा को,सामान्य जन के वास्तविक जीवनानुभव के प्रतिबिंब के रूप में प्रोत्साहन देना ।
  • कला के विभिन्न क्षेत्रों में नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना (जैसे साहित्य, संगीत, नृत्य और अभिनय आदि), वाणिज्य (जैसे विज्ञापन, पीआर, डिजिटल मीडिया का व्यवसाय आदि), विज्ञान और प्रौद्योगिकी (जैसे फोटोग्राफी, छायांकन, ध्वनि प्रौद्योगिकी और आभासी वास्तविकता आदि) ।
  • क्षेत्रीय रूप से विविधता लाने और विकेंद्रीकृत करने से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रोजगार के नये अवसरों को बढ़ावा देना ।
  • सिनेमा की सामूहिक संस्कृति के माध्यम से आम लोगों के बीच वैज्ञानिक स्वभाव, तर्क, उदारवाद और आधुनिकता को बढ़ावा देना ।
  • क्षेत्रीय सिनेमा की लोकप्रियता का उपयोग करते हुए वांछनीय परिणामों में जनता की राय को ढालनाया बदलना ।
  • बदलाव के माध्यम के रूप में सिनेमा का उपयोग करके सामाजिक सुधारों को सुनिश्चित करना ।
  • हाशिये के समाज जैसे महिलाओं और आदिवासियों के लिए डिजिटल प्लेटफ़ार्म प्रदान करना ।
  • साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत,सामाजिक मुद्दों और एक विशेष क्षेत्र और भाषा के स्थानीय रंगों का दस्तावेजीकरण ।
  • स्थानीय साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना ।
  • भारत के वास्तविक स्वरूप से दुनियाँ को अवगत कराना ।